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Born without a heart

मेडिकल की दुनिया में ऐसा अजूबा कभी नहीं हुआ था।    एक बच्चा बिना "दिल" के जन्मा और फिर भी एकदम चुस्त तंदुरस्त .... हां ; दिमाग का नाप नार्मल से बढ़ गया था थोड़ा और दिमाग धड़कने भी लगा था।   क़ुदरत का ये खेल था या इवोलुशन ? " जिस्म के जिस हिस्से का इस्तेमाल नहीं होता , वो गायब हो जाता है।"          दिल से सोचना इंसान ने बंद कर के अब सदियाँ जो बीती थी।   © Santosh Kadam

एक दरवाज़ा और चार दीवारें

साल ३०१७ के उत्खनन में एक दरवाज़ा और चार दीवारें मिली।   काफी संशोधन के बाद पता चला भविष्य में एलियंस को   , कि प्राचीन युग में इंसान इसे " घर " कहता था।   वो दरवाज़े और दिवार के सैंपल लेकर गया अपने प्लेनेट पर।    " इतने बड़े ग्रह में दरवाज़ा क्यों थे ? दीवारें क्यों थी ? "   इंसान इंसान में अविश्वास क्यों था ? दूरियां क्यों थी ? क्या यही वजह थी पृथ्वी की विनाश को ? " ऐसे कई सवालों पर एलियन्स अपने छोटे से खुशहाल प्लेनेट पर , अगले कई सालों तक संशोधन करता रहा।   © Santosh Kadam

Planet & Mole

एक ही प्लेनेट पर रहते हैं हम वो प्लेनेट जो तुम्हारे तिल से भी छोटा है।   इस प्लेनेट पर तुम इतनी दूर कैसी हो, की बरसों मुलाकातें नहीं होती ... इस बढ़ती भीड़ में इत्तेफ़ाक़ से बाजार में टकराओ तो सही।   © Santosh Kadam

Black Hole

भूखे ब्लैक होल के पास से गुजर कर भी " वो " प्लेनेट बच गया था उसकी चंगुल से। मिलियंस सालों के बिलियन्स दर्द उसके सीने में ठूस ठूस कर यूं भरे थे कि उसका दिल , खुद एक ब्लैक होल बन गया था - रौशनी निगलने वाला . . .   ब्लैक होल ; जो दूसरे ब्लैक होल को भी झांसा दे गया। सारी कायनात का दर्द , शायद दफन था वहा ..... ग्रेविटी बनकर ! पूरे यूनिवर्स में बेचारा अकेला पड़ गया था वो प्लेनेट ; अपने दर्द के साथ कभी कभी निकल पड़ता है वो यान लेकर अपने हमदर्द की तलाश में ... स्पेस की अनजान राहों पर ! © Santosh Kadam