Black Hole




भूखे ब्लैक होल के पास से गुजर कर भी
" वो " प्लेनेट बच गया था उसकी चंगुल से।

मिलियंस सालों के बिलियन्स दर्द
उसके सीने में ठूस ठूस कर यूं भरे थे
कि उसका दिल,
खुद एक ब्लैक होल बन गया था -
रौशनी निगलने वाला . . .  ब्लैक होल ;
जो दूसरे ब्लैक होल को भी झांसा दे गया।

सारी कायनात का दर्द , शायद दफन था वहा .....ग्रेविटी बनकर !

पूरे यूनिवर्स में बेचारा अकेला पड़ गया था वो प्लेनेट;
अपने दर्द के साथ

कभी कभी निकल पड़ता है वो
यान लेकर
अपने हमदर्द की तलाश में ...
स्पेस की अनजान राहों पर !

© Santosh Kadam

Comments